vidus

Eternal Learner

“शिक्षक दिवस के अवसर पर”

अक्षर ज्ञान करवाया

पापा ने बचपन में

लड्डु औ डंडा बनवा कर

भरवाते थे पन्नों में।

बस इसका खेल चला

क,ख,ग बनते ही गये

ह से हलंत तक फिर हम

कुछ दिन में सीख गये।

क कबूतर ख खरगोश

गुरू जी ने सिखाया

आगे का ज्ञान हमनें

पाठशाला में पाया ।

अंग्रेजी की पढाई

छे कक्षा में शुरू हुई

लकीरों को घुमा फिरा फिर

अल्फावेट्स सीख गई।

प्राइमरी से सेकेन्डरी तक

अनेकशःशिक्षक मिले

क्रमशः बढता गया ज्ञान

नूतन नूतन क्षेत्र खुले।

स्नातक से स्नातकोत्तर में

विद्वानों ने पढाया

रगड रगड बुद्धि को

भली भांति चमकाया।

पीएच डी के काम में

उलझन आई भारी

गुरूदेव ने हाथ पकड

नैया पार लगा दी।

ऐसे सारे गुरूजन

अज्ञान मिटाते रहे

उन लोगों से ले सीख

हम आगे बढते गये।

योगदान बडा उनका

व्यक्तित्व को बनाने में

शिक्षक दिवस के दिन

शीश नवाते चरणों में ।

विद्या

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