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“राजगीर का सौंदर्य”

पौराणिक ,धार्मिक राजगीर

पहाडियों,जंगलों में फैला

संगम स्थल जैन ,बौद्ध ,हिन्दू का

लगता यहां मलमास मेला।

अन्तर्राष्ट्रीय पर्यटक स्थान है

प्राकृतिक छटाएं भरी हुई

फूलपत्ती ,सतरंगी तितलियां

पंख पसारे मन मोहती हुई।

बसंत में तो आकर्षण बढता

असीम बहार आ जाती

आम्र डालियां,कलियां,सरसों

नयनाभिराम दृश्य बनाती।

विभिन्न जाति की तितलियां

रंग विरंगे फूल चूमती रहती

पपीहा,कोयल गा गा कर

अद्भुत अनुभूति है जगाती।

बुलबुल,तीतर,खंजन,टिटहरी

चीतल,लंगूर,नील गाय,सुअर

बुलडॉग,अजगर,कोबरा,स्किंक

अनेक प्रकार के जन्तु हैं इधर।

रॉयल बंगाल टाइगर,बियर

एशियाटिक लॉयन,लेपर्ड,हिरण

जैसे जंगली जीव भी यहां

करते रहते हैं विचरण।

स्वर्ण औ वैभव गिरि से गर्म जल

के झरने झरते ही रहते

सफेद जलधार गिर गिर कर

आकर्षक परिदृश्य बनाते।

औषधीय गुण से भी युक्त हैं

गर्म जल की सप्त धाराएं सभी

लाखों लोग करते हैं स्नान

असीम श्रद्धा से भर आज भी।

विश्व शान्ति स्तूप ,रोपवे,ब्रह्म कुंड

कटोरा झील ,नेचर सफारी

दुर्लभ वस्तुएं मिलती यहां पर

औषधि,वन्यप्राणी,वनस्पति।

वेणुवन,पंच पहाडियां हैं

सप्तपर्णी गुफा ,स्वर्ण भांडार

अनेक मंदिर धर्मशालाएं हैं

दर्शनीय स्थलों की भरमार ।

विद्या

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