कौन होंगे प्रथम पूज्य
जब इस पर विवाद छिडा
देव गण पहुंचे कैलाश
एक मत से नियम बना।
जो सर्व प्रथम परिक्रमा
कर आयेगा धरती का
बनेगा वही प्रथम देव
सारे देवताओं का।
आ गये सभी देवता
अपने वाहन पर सवार
उल्लसित हो अपने मन में
प्रथम होने का विचार।
लेकर अनुमति महादेव की
समय निश्चित किया गया
देव लोक में समाचार
सबको सुना दिया गया।
सरस्वती हंस,लक्ष्मी उल्लु
कार्तिक मोर,गणेश चूहा
दुर्गा ,काली सिंह पर आईं
गरूड पर आये गोविन्दा।
समयानुसार सभी निकले
पृथ्वी परिक्रमा करने को
यथा शक्ति ,तीव्र गति से
प्रथम पूज्य बनने को।
महाकाय गजबदन गणेश
अपने चूहे को तोलने लगे
कितनी दूर जा पायेगा ये
मन ही मन सोचने लगे।
बुद्धि कौंधी क्षण भर में
एक निर्णय ले लिया
माता पिता दोनों को
एक शिला पर बिठा दिया।
सवार होकर मूषक पर
उनकी परिक्रमा करने लगे
सात बार घूम कर वे
चरणों के पास बैठ गये।
दिन बीता लोग आये
देखा उनको विराजमान
गणेश कैसे आ गये पहले
इससे सब थे अनजान।
निर्णय की घडी आई तो
शिव ने पूछा गणपति से
सोचा तूने मेरी परिक्रमा को
बतला दो किस मति से।
कहा गणेश ने मैंने सोचा
आपके के चरणों में संसार है
कर लूं अगर ये परिक्रमा
तो मेरा बेडा पार है।
चमत्कृत हुए सब बुद्धि से
ऐसा तो उन्होंने सोचा न था
एक दृष्टि से देखें उनका
दावा भी बिलकुल सही था ।
सर्व सम्मति से गणेश
प्रथम देव चुने गये
अपार बुद्धि चला कर अपनी
प्रतियोगिता में प्रथम हुए।
तभी से होती आई है
सबसे पहले उनकी पूजा
फिर किसी ने नहीं लिया
इसके लिये नाम दूजा ।
विद्या
॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰
टिप्पणी करे