गौरी नंदन महा चंचल
पकडे रहते मां का आंचल
सबको तंग करते रहते
करतूतों से करते पागल।
भोग लगाये लड्डुओं को
चुपके से खा जाते हैं
नयन जब खोलती माता
थाल खाली दीखते हैं।
लेकर बाबा का डमरू
साथी संग भाग जाते हैं
डम ,डम बजा ,बजा कर
खेल खेल कर नाचते हैं।
सबको यथा योग्य जलपान
दो देती जगजननी गौरा
कार्तिक को दूध ,गणेश लड्डु
मोर ,मूषक को अनाज थोडा ।
लम्बोदर ,गजवदन ,विनायक
लड्डु का भोग लगाते हैं
चुपके से सूंढ बढा कर
कार्तिक का दूध पी जाते हैं।
देख कर आनन्दित होते
बाबा मैया प्रतिदिन
कहते मन नहीं लगता
इस नटखट गन्नु के बिन।
शिव परिवार के लाडले
परम शक्ति शाली भगवन
विघ्न हर्ता उद्धार कर्ता
कौन तारे तुमरे बिन।
भादो की चतुर्थी को आते
बल,विद्या ,बुद्धि दे देते
मान ,प्रतिष्ठा ,धन ,दौलत
समस्त वैभव प्रदान करते ।
इस बार फिर आओ नाथ
हम सबको कर दो सनाथ
खुशियों से घर भर दो
कभी न छोडो हमारा साथ ।
विद्या
॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰
टिप्पणी करे