vidus

Eternal Learner

“व्यस्तता”

व्यस्तता भरी है ये जिन्दगी

क्षण भर को आराम नहीं

करने पडते कितने काम

जीना भी आसान नहीं।

एक काम पूरा होते ही

दूसरा चला आता है

साइन करते थक जाते

ऊपर से प्रेसर आता है।

बहुत व्यस्त हैं सारे यहां

ऐसे काम के अंबार से

काम अधूरा ही रहता

खत्म न होता भांडार से।

टेबुल ,टेबुल फाइलें सब

चक्कर काटती ही रहतीं

जिनका काम उनकी आंखें

इंतजार में थकती रहतीं।

नकली है ये विजी नेस

सिर्फ दिखावे को विजी हैं

इनके लिये समय काटना

बहुत ज्यादा ही ईजी है।

आज न हो पायेगा काम

करने वाला छुट्टी में है

बार बार सबको घुमाना

ये तो इनकी घुट्टी में है।

जनता बेकार बैठी है

चाहे जितनी बार बुलाओ

लाइसेन्स हो या पेंशन

दौडा कर मार ही डालो।

सुखद जीवन नहीं मिलता

टाइम नहीं का रोना रोते

पांच घंटे के ऑफिस में

दस बार तो चाय पीते।

टेबुल कुर्सी रोती यहां

कोई तो बैठे आकर

बूढे ,जवान सारे लोग

निराश होते हैं जाकर ।

विद्या

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