Eternal Learner

“चांद के पीछे दुनिया”

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चांद सदा से आकर्षण रहा

धरती पर रहने वालों का

रूप ,सौंदर्य,शीतलता ले

मदमस्त ,मादक,मतवालों का।

भगवान राम ,कृष्ण ने मां से

“चन्द्र खिलौना लैय्हौं”कहा था

“चंदा मामा दूर के “गाकर

हम सबने भी पुआ मांगा था ।

“चांद सी महबूबा “से लेकर

“चांद फिर निकला”तक गाये

चांदनी की कुहेलिका में

बहुत प्रेमी प्रेमिका इतराये।

“चांद सा रौशन चेहरा”की

कल्पना ,चन्द्र मिशन ने तोड दी

पूनो के चांद की मसृणता

अभी भी धूमिल नहीं हुई।

अश,अश करता चेहरा उसका

मानव का ध्यान खींचता है

उसकी चांदनी का वितान

प्रेमी की याद दिलाता है।

दुनिया पडी चांद के पीछे

नित नूतन शोध करती जाती

अंदर क्या है?बाहर कैसा है?

क्या मानव वस्ती बन सकती।

भारत,अमेरिका,चीन,रूस

जापान,इजरायल ,कोरिया

और न जाने कितने ही देश

अनुसंधान कर रहे चन्द्रमा का।

भूमि की रजिस्ट्री शुरू हो गई

पानी की खोज भी जारी है

भूगर्भ के रत्नों को खोजना

उन सबके लिये जरूरी है।

एलियन की वस्ती औ सभ्यता

सबको ही पहचान लेंगे हम

हो सकेगा तो दो चार पकड

धरती पर ले आयेंगे हम।

है पडोसी इतना सुन्दर

क्यों नहीं ललचायेंगे हम

टकटकी लगा कर देखेंगे

चांद पर चढ जायेंगे हम।

चरखा वाली बुढिया को बुला

धरती की सैर करवायेंगे

यहां पर लाकर सब लोगों से

उसको खुशी से मिलवायेंगे ।

आकाश के चंदा पास होंगे

मीठे ,मीठे पुए बनवायेंगे

थाली प्याली में बैठ कर के

हम खूब मजे से खायेंगे ।

विद्या

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