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Eternal Learner

“हद से ज्यादा”

हद से ज्यादा कुछ भी

खतरनाक ही होता

हद में रहना जीवन

में आवश्यक होता।

गौतम बुद्ध ने कहा था

मध्यम मार्ग अपनाने

बीणा के तारों को

उचित रूप में बांधने।

ढीला न बहुत टाइट

संगीत सही निकलता

ऊपर नीचे होने पर

ध्वनि हीन ही रहता।

“अति सर्वत्र वर्जयेत”कहा

हमारे विद्वानों ने भी

अति रूप अति सम्पदा

कर देता विनाश ही।

हद से ज्यादा विलासिता

हद से ज्यादा भक्ति

नष्ट कर देता मानव की

शारीरिक मानसिक शक्ति।

लक्ष्मण रेखा की हद को

पार किया था सीता ने

हरण,वियोग की पीडा

झेला परम पुनीता ने।

समुद्र पारावार तोडे

नदियां बहे हद के पार

उथल पुथल मच जायेगा

डूब जायेगा संसार।

हद से ज्यादा भोजन

हद से ज्यादा सोना

हद से ज्यादा घूमना

बेकार बैठे रहना।

कर देता सब व्यर्थ

हमारी दिनचर्या को

काम बिगड जाता है

बिगाडता ऋतुचर्या को ।

सम्यक संतुलन से चलते

सूरज ,चांद,सितारे

सागर ,पृथ्वी ,आकाश

हद में रहते सारे ।

हद में रहना उचित है

संयम को नहीं छोडना

सुखद जीवन जीना है

अपनी सीमा में रहना।

विद्या

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