vidus

Eternal Learner

“जीवन की जंग”

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चलती जंग जीवन संग

पल भर को विश्राम नहीं

होते रहे तंग लोग दंग

पर उपाय का पता नहीं।

भोजन ,आवास ,शिक्षा के

कितने ही प्रश्न उठे हुए हैं

हर स्तर पर स्ट्रगल चलता

हम भारतीय लगे हुए हैं।

लिमिट में भोजन ,पानी ,दवा

मिलते रहते सरकार से

बिचौलिये अधिकारी सब

कमीशन खाते अधिकार से।

तीन लाख पास हुए घर के

बुधनी देवी के नाम से

गर कमीशन पचास न देगी

चली जायेगी काम से।

नहीं मिलेगा पैसा उसको

दिन बढते जाते रहेंगे

निराश मन घर बनाने वाले

घर बैठ रोते रहेंगे।

कमीशन दिया पैसा मिला

आवास बना आधा अधूरा

छप्पर को छत बनाने का

वो सपना तो हुआ पूरा।

सरकारी अनाज पाने को

भी लल्लो चप्पो करती

हर बार उचित मात्रा में

पाने को झगडती रहती।

नीयत साफ सरकार की

वो तो देते जा रहे हैं

पर झोपडी वालों का हक

महल वाले खा रहे हैं।

बरसों से आती जंग

समाप्त होने को नहीं है

गरीबी अमीरी की खाई

कभी मिटने को नहीं है ।

विद्या

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