बता कर नहीं आता
अनायास ही आ जाता
नदी में गिरते चट्टानों
जैसा प्रलय मचाता।
कामना होती अच्छे
ख़ुशनुमा टाइम की
कभी नहीं चाहते हैं
बुरे वक्त आगमन की।
वक्त तो वक्त है करता
बहुत ही मन मानी है
कर जाता है वही जो
उसने मन में ठानी है।
बुरा क्या है अच्छा क्या
निर्णय इसका कठिन है
एक के लिये अच्छा
दूसरे का बुरा दिन है।
चमकीली धूप सुखी
करती कुम्हार ,रजक को
वही दुखी करती है
खेती करते कृषक को।
जब लाभ सधता अपना
वे दिन बहुत अच्छे हैं
ज़रा सी गड़बड़ हो तो
हो जाता मन उन्मन है।
“लाभ,हानि,जीवन,मरण”
कुछ हमारे हाथ नहीं
जिसके हाथ है वो तो
सदा हमारे साथ नहीं।
अच्छा समय चाहते हम
हमेशा ही जीवन में
चोर चोरी करने में
ठग ठगी ही करने में।
बुरा समय नहीं आये
कामना करते रहते
अच्छे ही अच्छे दिन हों
ये हम मनाते रहते।
विद्या
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