अपार जल राशि संपन्न
उमड़ते घुमड़ते बादल
सूरज,चांद,तारों को भी
ढँक लेने वाले बादल।
फैलाते साम्राज्य यहाँ
मानसून में आ जग में
परितृप्त कर देते धरा
जीवनी भरते पादप में ।
लेने देने का व्यापार
सूरज धरती का बना हुआ
प्रमाण रूप आता ये
जल से लद बद भरा हुआ।
रात दिन से नहीं मतलब
जब मन होता बरस जाते
धरा पर के जीवन को
पूरा अस्त व्यस्त बनाते।
रात में जब बरसने लगते
बिजली ठनके के साथ
अंधकार घना हो जाता
हाथ को नहीं सूझता हाथ।
भादो की रात में तो
मत पूछो क्या होता है
धर लेता विकराल रूप
कुछ ज़्यादा ही डरा देता है।
उद्दंड नायक सा ये
तहस नहस कर देता
जीवनी तो भरता है
पर विनाश भी कर देता।
कौवा ,तोता,मैना,बंदर
गाय माल ,कुत्ते ,सुअर
भींगते,भोजन के लिये
छुछुआते इधर से उधर।
प्रेम रस भरी नायिकाएँ
मिलन विरह में डूबी हुईं
उमग उमग कर गाती हैं
गीत स्वागत में इसकी।
छोटी मोटी नदियाँ
उमग कर चलने लगतीं
फैलातीं पारावार
तीव्र गति से भगतीं।
रसा को भर रस से
बीज सुगबुगाने लगते
भूमि को फोड़ कर
ऊपर उठने लगते।
प्रकृति खेलती रंग बदल
सृष्टि को चलाने के लिये
कण कण उत्कंठित होता
संजीवनी पाने के लिये।
विद्या
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