vidus

Eternal Learner

“इगनोर करना”

↳

इगनोर करना सीखना

जीवन की साधना है

क्रोध या नफरत नहीं

सुख चैन से जीना है।

जब तक लोगों की बात को

हम दिल पर लेते रहेंगे

दुखी विकल होते रहेंगे

मन को डुबोते रहेंगे ।

अच्छा कहने पर किसी के

मन नभ में उडने लगेगा

कहते ही किसी के खराब

दुख सागर में डूबेगा।

हमारा है अपना अस्तित्व

अपने ही दम पर निर्भर

किसी के कहने सुनने का

बेमतलब क्यों पडे असर।

“हाथी चले बाजार”की

तर्ज पर हम चलते रहें

रहें मुक्त चिन्ता से

निर्द्वन्द हो जीते रहें।

इगनोर करना बदलता

आपके पोजीशन को

परिस्थिति, पैसा ,प्रभाव

सारे ही कंडीशन को।

जरूरी नहीं कि हर बात को

हम पकड कर ही रखें

अच्छा या खराब कहने पर

वेचैन हो व्याकुल रहें।

अपनी सीमा के अंदर ही

यहां चलना बुद्धिमानी है

बातों को इगनोर करना

होशियारी की निशानी है।

अगर जीना है शान्ति से

सीख लो इगनोर करना

सर्वोत्तम लक्ष्य के मार्ग पर

दृढता से आगे बढना।

विद्या

॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰

··················

टिप्पणियाँ

टिप्पणी करे