हलो,कविया,आई नहीं ?
हाँ,नहीं आई मैम आज
बहुत कूटा है,उसने मुझे
कैसे करूँगी ,मैं कोई काज?
कूटा?क्यों?तू छोड़ती क्यों नहीं उसको ?
क्या करूँ ,कहाँ जाऊँगी?
कोई तो नहीं रख पायेगा
दो ,दो बच्चों संग मुझको।
वैसे मारता नहीं है मैम
बहुत मानता है ,सब कुछ
ला देता है,खर्ची चलाता है
तभी तो नहीं छोड़ती मैं ।
हाँ जब पीकर आता है
तो नशा में ,नशा में रहता है न
तभी कूटता है मुझे ,मैं क्या कहूँ ?
मज़दूर आदमी है ,दो चार दिनों में
पी ही लेता है।
अच्छा ,तो तू यूँ ही कूटती रह
मार भी खाती है ,प्यार भी दिखाती है ,
अब मेरा क्या?मेरा काम बिगाड़तीं रह ,
मैं तुम लोगों की कथा सुनती रहूँ।
अब कब आयेगी ये बता ?
दो दिन लगेंगे मैम मुझे
दवा ले रही हूँ ,दूध हल्दी पी रही हूँ
आप,दो दिन बाहर से आर्डर मंगवा लो।
वार्ता सुन रहे पतिदेव बोले ,
देखा समझदारी उसकी ?
मार खाकर भी पति की निन्दा
नहीं करती है,तुम ऐसा कर सकती हो?
खीजा हुआ मेरा मन और खीज गया
हाँ ,हाँ,यही सब बचा है अब तुम भी
शुरू हो जाओ।
दाम्पत्य सुख का ऐसा नजारा
आम है हमारे समाज में
कविया तो कुटाती है तो बताती है
सम्भ्रान्त लेडी बाथरूम में गिर जाती है।
विद्या
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