सुन्दरता बदलती है
काल की ही चाल से
नैन,नक्श,रंग,केश ,सब
हो जाते बदहाल से।
दिखने और होने में
सुन्दर,है बहुत अंतर
कुरूप लोग भी यहाँ
बहुत सुन्दर होते हैं।
सुन्दरता है हमारा
भाव,विचार,व्यवहार
प्रेम,करूणा,दया,स्नेह
सहयोग करने का विचार।
सद्गुण को अपना कर
कोमल भाव को भरकर
मन में प्रेम जगा कर
बनाते जग को सुन्दर।
साहस,धैर्य,परिश्रम
सहनशीलता ,सेवा
अपनाते नर नारी
क्रम से पाते मेवा।
ये होते हैं अति सुन्दर
मंजुल कर्म अपना कर
दिखते नहीं पर होते
जीवों को संतुष्ट कर।
अप्सरा भी बदल जाती
उम्र के साथ साथ पर
कर्म सौंदर्य का स्वरूप
बढ़ता जाता हर हाल पर।
दिखना सुन्दर प्रभु हाथ
जैसा हुआ बना दिये
होना सुन्दर हमारे हाथ
सुन्दर कर्म अपना लिये।
अच्छे कर्म व्यक्ति को
स्थाई सुन्दर बनाते
समय संग संग उसकी
चमक बढ़ाते रहते।
सुन्दर कुरूप जो भी हों
कर्म करें सारे सुन्दर
कर्म की सुन्दरता बनाती
करने वालों को अमर।
विद्या
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