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“कामाख्या का महत्व”

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नीलांचल पर्वत पर बसा ये

मातृत्व शक्ति का साक्षात स्वरूप

विपुल प्राकृतिक हरियाली है

वास्तु कला का आध्यात्मिक रूप।

कहते सती का योनी भाग

यहाँ पर ही गिराया गया था

उसी आकार की प्रस्तर शिला

मूर्ति रूप में अपनाया गया था।

कामना पूर्ण करने वाली

माँ कामाख्या सृजन करती हैं

तंत्र साधना की हैं अधिष्ठात्री

आदि शक्ति की सजग अभिव्यक्ति हैं।

रहस्य मय ,गूढ़,तांत्रिक ,बहुरूपी

दस महाविद्याओं का स्वरूप

ज्ञान साधना शक्ति का आयाम

हर भाव,शक्ति का जीवन्त रूप।

प्रति वर्ष साधक ,तांत्रिक पर्यटक

मनाते हैं अम्बुवाची मेला

माँ के सृजन रूप का उत्सव

कभी न मना सकते अकेला ।

पहले बड़ा दुर्गम मार्ग था

साधक गण पैदल ही जाते थे

रहस्य शक्ति सम्पन्न नारी नर

विरले लोग ही आ पाते थे।

योगी संग योगिनियाँ भी

मंत्र मारती थीं रहस्य भरा

बना देती थीं भेड ,बकरी

वातावरण रहता था डरा डरा।

साक्षात शक्ति बैठीं यहाँ पर

दुर्गम स्थान को पकड करके

आस्तिक जन पहुँचते वहाँ पर

कामना अपनी पूरी करके।

लाल पताका लहराता रहता

अलौकिकता का प्रदर्शन करता

जगजननी सब विद्याओं संग में

स्थित हैं यहाँ बताता रहता।

मनमोहक नज़ारों से भरा ये

शांत मनोहर वादियाँ फैलीं

कण कण में आभासित होतीं

दिव्य महाशक्तियों की रैली ।

विद्या

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