आ गया शारदीय नवरात्र
जीवंतता भर गई जग में
आराधक जन फूल बिछाते
मोहिनी भवानी के पग में ।
आते ही देव पक्ष यहाँ
आराधन प्रारंभ हो जाता
आराधकों का भवानी से
है अनमोल भक्ति पूर्ण नाता।
लेकर देवताओं का तेज
महा शक्ति सम्पन्न माता आईं
सुख,शान्ति,संरक्षण,स्वास्थ्य देने
पूर्व की भाँति इस बार आईं।
शैल पुत्री ,ब्रह्मचारिणी,गौरी
कात्यायनी माँ ,स्कन्द माता
चन्द्र घंटा,कुष्मांडा,सिद्धि दात्री
की पूजा कर प्रसाद पाता।
लाकर सिंहासन बिठाते हैं
महा विद्याएं संग साथ में
श्रद्धा सुमन अर्पित करते सभी
देवियों के कोमल हाथ में।
उपवास करते कलश धरते
सारे ही भक्त जन इस जग के
शक्ति भर सामग्री चढाते
माता रानी की ही पसन्द के।
जैसी जिसकी कल्पना होती
वैसा ही भाव दिखलाती हैं
घर घर में आकर महामाया
आनंद से परिपूर्ण करतीं हैं।
जागृत हो गये सारे पीठ
सकारात्मक शक्ति से परिपूर्ण
कामना पूरा करतीं सबके
धन धान्य से कर देतीं पूर्ण।
दुखी जन को सुखी करतीं
महारोगी को करतीं निरोग
बांझ नारी को पुत्र दे देतीं
निर्धन को देती सारे भोग।
कर पाते आराधन उनका
पवित्र होकर अंतर्मन से
मिलती जाती सफलता उसको
माता के आशीर्वचन से।
दुख दर्द दूर कर देना माँ
संसार के सारे लोगों का
सभी अरमान पूर्ण कर देना
हम लोगों के भोगों का।
विद्या
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