सूर्पनखा की नाक कटने से
नासिक इसका नाम पडा
पौराणिक महत्व के कारण
नाम है इसका बहुत बडा।
यहीं हरण किया था रावण ने
हमारी माता सीता रानी को
जीवंत स्वरूप दिखाता है ये
रामायण की कहानी को ।
सीता रसोई, सीता गुफा ,
अभी तक यहाँ मिलते हैं
वहाँ खड़े होकर हम उस
पवित्र कथा को याद करते हैं।
वनवास के समय पंचवटी में
राम ने निवास किया था
समृद्ध प्रकृति की सुविधाओं
का भरपूर उपयोग किया था।
पौराणिक,ऐतिहासिक ,धार्मिक
आर्थिक महत्व से संपन्न
प्रसिद्ध हैं विश्व भर में
नासिक नगर सुन्दरतम।
त्रम्बकेश्वर शिव मंदिर
द्वादश ज्योतिर्लिंगों में एक
गोदावरी नदी का उद्गम स्थल
फैले अंगूर के बाग अनेक।
चौबीस बौद्ध गुफ़ाएँ बनी हैं
आठ किलोमीटर के अंदर
वास्तु कला ,प्राकृतिक दृश्य
बने हुए हैं सुन्दर सुन्दर ।
गोदावरी के तट पर लगता
महाकुंभ का बड़ा मेला
रामकुंड, कालाराम मंदिर
विभिन्न बाग तपोवन अकेला।
सफ़ेद संग का मुक्तिधाम मंदिर
अनेक देवी देवताओं संग
ज्योतिर्लिंगों की प्रतिकृतियाँ
बिखराते हैं बहुतेरे रंग ।
सुरा वाईन यार्डस ,करेंसीनोट प्रेस
इंडिया सिक्योरिटी प्रेस जैसी संस्था
सरकारी ,औद्योगिक,सब प्रकार के
काम करने वाली संस्था।
सोमेश्वर झरना,क्वाइम म्युजियम
फैली पहाड़ों पर हरियाली
पाँच वट वृक्षों के मध्य है
ऊर्जा भरी गुफा प्यारी ।
छोटी सी संकीर्ण गुफा में
सीता रानी रहती थी
वनवास के दिन धैर्य से
वहीं बैठ कर काटती थीं।
विभिन्न प्रकार के फल फूल
बहुतायत में उगे हुए वहाँ पर
पूजा फलाहार के लिये कोई
अभाव नहीं था वहाँ पर ।
वनवास कथा का बना साक्षी
नासिक जीवंतता से भरपूर
सारे परिदृश्य दिखलाते हैं
पौराणिक कथाओं को जरूर ।
विद्या
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