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“शरद ऋतु में माता रानी”

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आती सुहावनी शरद

भरती अन्न से भांडार

प्रकृति रूप दुर्गा माता

लाती आशीष अपार।

कण कण में विराजतीं

चहुंदिश अंदर बाहर

सृष्टि में व्याप्त हैं माता

दसों दिशाओं के अंदर ।

व्यापक रूप दीखता

शस्य ,फूल ,फल सबमें

हर रूप में मुस्काती मां

प्रकृति के रेशे रेशे में।

अनोखा रूप उनका

दिव्यता टपकती है

नारी शक्ति ,सौम्यता

का दर्शन करवाती है।

सालभर से इंतजार

करते रहते भक्त जन

तब विशेष दिन आता

नवरात्रि का पावन ।

वैसे भी घर घर की

नित पूजा में रहतीं

भक्तों को आशीष वो

निरन्तर देती रहतीं।

इस ऋतु में आगमन

विशेष रूप से शुभ होता

सौम्य,सुस्मित वातावरण

मन को भव्यता में डुबोता।

भर देतीं आंचल सबका

बहुमूल्य उपहारों से

तन मन आनंदित करतीं

सुखद आशीर्वादों से ।

विद्या

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