शुभ,सुखद़सुन्दर,कोमल
कांस फूस श्वेत रंग
रूप ले आती स्वाति
अन्न भरी शाखा संग।
हथिया के दान को
घर में लाने के लिये
आ जाती ये हर बार
शस्य समेटने के लिये।
अब नहीं चाहिये वर्षा
कीचड,कादो,पानी
काट बांध कर लाने में
होगी हमें आसानी।
शुभ लक्षण वाला नक्षत्र
शुभ ही शुभ ले आता
सबके घर को सहज ही
अन्न धन से भर जाता ।
चातक,कदली,सीप
पूर्ण संतुष्ट हो जाते
अपनी अपनी रूचि से
मन माना फल पाते।
श्वेत छटा बिखरी है
चारो तरफ धरती पर
सद्यःस्नाता बन बैठी है
प्रकृति ही यहां पर।
वर्षा से भींगी धरती
सूखती आनंद में
सूर्य की रश्मियों संग
इठलाती अभिमान से।
संपदा संग रूप देखो
धन से भरे भांडार
स्वस्थ,बलिष्ठ संतति देखो
लगन परिश्रम अपार।
शुभकामनाएं आशीष
देती मानव जाति को
आकर हर बार ये तो
पूर्ण करती धरा को।
विद्या
॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰
एक उत्तर दें