Eternal Learner

“महंगाई”

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महंगाई की मार पड रही

देश के नौजवानों पर

खाना,पीना,आना ,जाना

यानी मतलब के कामों पर।

खाने की चीजें हैं महंगी

पिज्जा ,बर्गर ,के एफ सी चिकन

बाहर ही बाहर खाने से

मिलता है मनचाहा मटन।

कौन बनाये रोटी दाल

बहुत ज्यादा झंझट लगता है

होटल बाजी की ओर ही

बच्चों का मन भगता है।

स्टैंडर्ड का तकाजा है यहां पर

कपडे,जूते ब्रांडेड चाहिये

घडी,मोबाइल ,पेन ,लैपटॉप

सभी हाई फाई चाहिये ।

नौ की लकडी नब्बे खरचा

होता रहता आराम से

बचत के नाम कुछ नहीं आता

उड जाता सब काम से।

महंगा,महंगा कहते कहते

उसी की तरफ लपकते हैं

किसी सस्ती वस्तु पर तो

नजर भी नहीं डालते हैं।

एक लाख की सैलरी पर वे

दो लाख की मोबाइल लेते

ईं एम आई भरते भरते

अपनी हालत खराब करते।

जमाना है दिखाने का सबको

अपना अपना स्टेटस हाई

सस्ती वस्तुएं होतीं खराब

सूट,साडी हो या कि टाई।

महंगी वस्तुएं अपना कर उनका

आत्म सम्मान तृप्त होता है

महंगाई का रोना रोते पर

सस्ता से उन्हें डर लगता है।

मजदूरी करके भी लोग

नया नया मोबाईल लेते

भोजन पानी पर कम खर्चते

रिचार्ज जरूर करवाते रहते।

आवश्यक आवश्यकता बदल गई

निम्न मध्यम वर्ग के लोगों में

मोबाईल,चार्जर ,कैमरा

इन्टरनेट आ गया जरूरी में।

बढ रही महंगाई बहुत

लोग अमीर बनते जा रहे

मोबाईल के नये मॉडल हेतु

लम्बी लाइन लगाते जा रहे।

विद्या

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