चाँदनी में नहा रही रात
कोजागरी पूर्णिमा की
बरसता अमृत चंद्रमा से
दिखा रही सुन्दर झांकी।
सोलह कलाओं से संपूर्ण
मंजुल चमकीला चाँद है
धरा के आकर्षण में खिंच
उसके क़रीब आता है।
रहस्य भरी चाँदनी फैली
हरतरफ हमारी सृष्टि में
काल्पनिक संसार दीखता
सबकी फैली आँखों में।
उसकी मसृण किरणें ऐसी
कुहेलिका निर्मित करती
स्वर्गिक आनंद का अनुभव
पृथ्वी वासी को करवा देतीं।
कृत्रिम प्रकाश में रहने वाला
जब प्रकृति के क़रीब आता है
सुखद रोमांचक अनुभव को
अनुभूत वो कर पाता है।
कोमल किरणें सुखद ठंड से
आत्मा तृप्त होती रहती
रोमांच भरे सुख सबके
मन में हैं भरती रहतीं।
शरद चाँदनी बरस रही है
दिग दिगन्त चहुँओर
अनवरत बरसती रहेगी
संध्या से हो जायेगी भोर।
सुखद चाँदनी में नहा कर
वनस्पतियाँ नव जीवन पायेंगी
औषधियाँ अमृत से भरेंगी
सबको स्वस्थ कर पायेंगी।
माँ लक्ष्मी विचरण करतीं
घर घर आ निरीक्षण करतीं
खीर,फल,मिष्ठान का
हर्षित हो कर भोग लगातीं।
बरसाता अमृत चाँद
चाँदनी में रखे पायस में
चिरकालिक से आतीं परम्परा
अपने ही देश भारत में।
विद्या
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