Eternal Learner

“यात्रा छोटी है”

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यात्रा छोटी है जीवन की

जन्म से मृत्यु गिनती के वर्ष

इतने में ही हम भोग लेते हैं

उत्थान पतन विषाद और हर्ष ।

भूलकर यात्रा की सीमा

लड़ते ,कटते औ मरते

छोटी-छोटी चीजों के लिये

प्राण लेने को तैयार रहते ।

बचपन खेल में बीतता

जवानी अनुराग ,रास,रंग में

बुढापा आते देर न लगती

आयु घटती जाती संग में।

कब काल पकड़ लेगा ये भी

हम सब नहीं जानते हैं

पर धन दौलत,ज़मीन के लिये

लड़ने से नहीं मानते हैं।

थोड़ी सी ज़मीन के लिये

कोर्ट कचहरी तक जाते

जीवन की गाढ़ी कमाई से

वकीलों की जेब भरते रहते।

यात्रा ऐसी कि पता नहीं कब

गाड़ी से उतार दिये जायें

इसके आगे गति नहीं आपकी

अच्छी तरह समझा दिये जायें।

आँख बंद डिब्बा ग़ायब होता

कुछ भी कहीं नहीं दीखता

अर्जित किया हुआ धन भी

धरती पर पड़ा रह जाता।

मानव हाँफ जाता है

सौ साल तक जीते -जीते

जीवन के उत्थान पतन

अमृत गरल पीते -पीते।

जहां कहीं से आये हैं हम

जहां कहीं भी जाना है

इस छोटी सी अवधि का यहाँ

इतना बड़ा फसाना है।

लड़ना छोड़ प्रेम करना सीखें

इस छोटी सी यात्रा में

मानवता के उत्थान के लिये

करें श्रम विपुल मात्रा में ।

विद्या

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