Eternal Learner

“मन को आदेश देना “

↳

मन क्या है ,रहता कहाँ ?

सोच कर देखें जरा

दिमाग चकराये नहीं

विषय है ये बहुत बडा।

मालिक है या सेवक

दिशा देता कि लेता

वश के बाहर होता

विनाश ही कर देता ।

नियंत्रण में इसे रखना

इच्छानुसार चलाना

आसान नहीं है यहाँ

सीमा में बांध रखना।

चंचलता इतनी कि

प्रकाश से तेज चलता

बैठे -बैठे ही सबको

सर्वत्र घुमाते रहता।

वश में रखने वाला

साधक बन जाता है

सीधी सच्ची राह धर

श्रेष्ठता पा लेता है।

आकाश में उड़ना हो

पाताल में ही जाना

आसानी से हो जाता

कोई नहीं है ठिकाना।

इन्द्रियों को वश में रखना

मन के ही अंदर है

वो ही अगर उदंड हुआ

तो जीवन कैसे सुन्दर है।

बुद्धि चलाती मन को

यदि विवेक के अनुसार

सन्मार्ग पर चलता मानव

ज़्यादा न करता विचार।

“मन के हारे हार है

मन के जीते होती जीत “

विजय प्राप्त कर लेता

हो जाती सबसे प्रीत ।

विद्या

॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰

··················

टिप्पणियाँ

एक उत्तर दें