चहुंदिश बिखरा है सौंदर्य
सभी नहीं देख पाते हैं
काल्पनिक दृष्टि के अभाव में
बिन देखे ही रह जाते हैं।
फैला है सौंदर्य यहां
प्रकृति के कण कण में
देख नही पाते हम सब
चिंता करते रहते मन में ।
लाल ,पीले फूल हरे पत्ते
लिये गुलमोहर ,अमलतास
चटक रंग के वैषम्य का
आकर्षण बना देते हैं खास।
आक ,धतूरा ,कनेर ,कचनार
उजला ,नीला,पीला ,गुलाबी
रंगों की विभिन्नता से बनाते
हमारे माहौल को शराबी।
आम , केला ,पपीता ,नारंगी
सब अपने आकार रंग से
सुन्दर बनाते बागीचे को
लुभाते सबको अपने ढंग से।
हरा धान ,सुनहरा गेहूं ,
पीली सरसो,काली अरहर
कितने ही रंग बिखरते है
हर मौसम में यहां पर।
रंग विरंगी चिडियां उडती
चिकने धारीदार जानवर
ध्यान खींचते हम लोगों का
अनेक जीव सुन्दर- सुन्दर।
बंदर ,मेढक,बकरी,छिपकली
गाय,बैल,कुत्ता,बिल्ली
सभी बनावट में हैं सुन्दर
पहचानों न उडाओ खिल्ली।
हरी भूमि,नीला आकाश
हरे भरे पेड ,समुद्र भी नीला
धूसर पहाडियां हरी वादियां
चमकते सूर्य का रंग पीला।
सूर्योदय – सूर्यास्त के समय
गहरा लाल पीला क्षितिज
अनेक बिम्ब बना देता है
अति सुन्दर लगता अंतरिक्ष ।
बिखरे सौंदर्य को देखने को
दृष्टि विशेष होनी चाहिये
इठलाती प्रकृति के रेशे रेशे को
पहचान पाना चाहिये।
विद्या
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