Eternal Learner

“दीपावली”

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दीपों का त्योहार आया

जगमगाता घर आँगन

कच्चे पक्के गृह यहाँ पर

छोटे बड़े चिकने प्रांगण।

गोबर ,मिट्टी से लीप पोत

धो ,पोंछ कर पक्के जमीन

विभिन्न रंगोली सजती है

फूल,पिठार,अबीर से रंगीन।

बड़े व्यस्त हैं बिजली के लट्टू

कैंडिल दीपक जलाने में

छोटे लगे हुए लगन से

सुन्दर घरकोल बनाने में।

ईंट,मिट्टी,गत्ते,थर्मोकोल से

छोटे बड़े घर कुंडा बनते

मिट्टी के छोटे वर्तन में

लावा ,वताशा,लड्डु रखते।

घर कुंडा किसका सुन्दर है

इसकी चर्चा होती रहती

प्रतियोगिता में आगे रहने

की जुगत भिड़ाते ही रहते।

माना जाता लक्ष्मी गणेश

इस नूतन घर में आयेंगे

देंगे आशीर्वचन हमलोगों को

ऐश्वर्यवान बना देंगे।

अनार ,घिरनी,फुलझड़ी ,रॉकेट

तरह तरह के पटाके आते

उत्साह भरे बच्चों के संग

बड़े लोग मिलकर जलाते।

अग्नि शिखाएं उड़तीं गगन में

धूम धड़ाम,फुटुक ,फ़टाक के साथ

रोशनी का खेल इस दिन

चलता रहता है सारी रात।

संध्या में नये कपड़े पहन

सबलोग तैयार होते

शुभ मुहूर्त में पूजा करने

दीप जलाने में लग जाते ।

खील वताशा,नारियल ,मिठाई

बांटे और खाये जाते

एक दूसरे के घर जाकर

आपस में गले मिलते।

अंधकार पर प्रकाश की जीत

का संदेश मिलता रहता

अनेक पौराणिक कथाओं से

इसका सम्बन्ध जोड़ा जाता।

विजयी राम के वापस आने

के उपलक्ष्य में मनाया जाता

लक्ष्मी गणेश के शुभ आगमन

की ख़ुशी में मनाया जाता।

कहीं कहीं पूजा की जाती

महारानी देवी काली की

भय दूर कर रक्षा करने

समृद्धि देने वाली की।

अमा रात्रि में चहुंदिश

जगर मगर दीपक जलते

प्रकाश का त्योहार मनता

गाँव शहर सर्वत्र सजते।

विद्या

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