प्रभात का फैला प्रकाश
अंतस की अमा बाकी है
चेतना जगत के ऊपर
ज्ञान की प्रभा बाकी है।
आत्मा के चोटिल घाव पर
संवेदना लेप बाकी है
मन की असंतुलित गति पर
नियंत्रण अभी बाकी है।
आत्मबोध की खोज में रत
मानवता तो वेचैन है
उथल पुथल भरे जग में
शान्ति की खोज बाकी है।
मन ,,वुद्धि ,विवेक ,चेतना
परत दर परत हैं जेहन में
सबके बीच तारतम्य
बिठाना अभी बाकी है ।
आत्मा में है परमात्मा
गीता देता है ये ज्ञान
अज्ञानी मानव के मन में
ये ज्ञान आना बाकी है।
विद्या
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