vidus

Eternal Learner

What fears have you overcome and how?

भागलपुर बिहार के अलीगंज वाले घर में हम लोग रहने लगे थे ।मेरी सासु माता लकवा ग्रस्त थीं सबसे आगेवाला कमरा उनका था।उनके विस्तर का चादर थोडा लटका हुआ रहता था ।एक दिन मुझे उस पलंग के नीचे एक सांप कुंडली मार कर पडा हुआ दिखा जिसे मेरी बिल्ली मुंह मे लेकर आ गई थी ।वो प्रायःइसी तरह हरहरा सांप को ले आती थी फिर पंजे से मार मार कर अधमरा कर देती थी ।उस सांप से डर नहीं लगता था पर उस दिन काला लम्बा और जहरीला सांप था

उसे देख कर मैंऔर मेरे बच्चे डर गये ।बिल्ली को भगाया अब डर था कि वो सांप चादर से चढकर माता जी न काट ले।चू्ंकि बिल्ली की गतिविधि से आक्रान्त था सांप इसीलिये हिल डुल नहीं रहा था सोने या मरने का नाटक कर रहा था ।अब हमलोग पेशोपेश में कि क्या किया जाये।माता जी को हटाना संभव नहीं था न ही सांप को भगाना ।घर में मेरी छोटी बेटी ऋचा दोनों बेटे अभिनव वैभव थे।दस बारहबर्ष उम्र थी उसकी ।अभिनव बहुत हिन्मत वाला है वैसे ही ऋचा भी ।दोनों ने तय किया कि एक फूलवाला झाडू लेकर सांप को कमरे से बाहर वरामदा पर निकाल देगा फिर ऋचा सूप में उसे लेकर ताड के वृक्ष के पास रख देगी ।मैं डर से अलग थलग ही थी ।अभिनव ने जब सांप को झाडू से खिसकाया तो वो वैसे ही पलट गया सबको लगा कि खत्म है उसे वरामदे से एक सूप में डालकर हाता पार करके ताडके पेड के नीचे ढक कर रख दिया गया कि शाम में पापा को दिखायेंगे कि कैसे हम लोगों ने संकट दूर किया ।मैं डर से बाहर निकली पर शाम में जब उसके पापादेखने गये तो वहां सांप नहीं था ।मुझे अब सोच सोच कर व्यथा हो रही थी किजिसे मरा समझा जा रहा था वो जिन्दा था अगर उस समय सूप में ले जाते समय ऋचा को काट लेता तो क्या होता ।उसके बाद पता नहीं कितने देवी देवताओं का स्मरण कर प्रणाम किया कि आपने मेरे बच्चों और माता जी को मौत के मुंह से निकाल लिया ।

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