कृत्रिमता बनावटी पन है
नकली भावों का अंबार
सोच सोच कर बन गया है
दिखावटी चीजों का अंबार।
संवेदना त्वरित उगती
देख कोमल करूण दृश्य
मन कांपता हृदय विगलित
देख भाव भरे परिदृश्य।
करूणा ,वेदना ,भावना
मनुज हृदय में मारे हिलोर
देख किसी का सुख दुख
कर देता सबको विभोर।
कृत्रिमता निस्पृह रहती
यंत्र वत कार्य करती है
कोई मरेकोई जले पर
उस पर ध्यान नहीं देती है।
कृत्रिमता पराकाष्ठा हा
विज्ञान के अन्वेषण की
नई नई वस्तु बनाने की
अनेक अनुसंधान की।
प्यार मुहब्बत लाड दुलार
संवेदना के अंग हैं
इसके बिना मानव जीवन
नीरस शुष्क वेरंग हैं।
कृत्रिमता या संवेदना
किसको चयन करेगा नर
ऊहा पोह में पडा है जीवन
इधर जायें या उधर ।
विद्या
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