vidus

Eternal Learner

What’s a common misconception people have about happiness?

ये एक जटिल प्रश्न है जो दिखने में सामान्य लगता है क्यों कि आप कब खुश होंगे का उत्तर अलग अलग अलग लोगों का अलग अलग होगा ।जैसे एक चोर बहुत बडा हाथ मारने के बाद खुश होगा तो एक दानी बहुत अधिक दान करके एक विद्वान अपने ग्रन्थ को पूर्ण करके खुश होगा तो एक मूर्ख अपनी मूर्खता पूर्ण बातों से लोगों को हंसा कर ।हम अपनी प्रवृति एवं परिस्थिति के अनुसार प्रसन्न या दुखी होते हैं ।जैसे कुम्हार धूप उगने पर खुश होता है कि उसके बर्तन जल्दी सूखेंगे और किसान वर्षा होने पर कि फसल अच्छी होगी ।जहां तक कॉमन गलतफहमी की बात है तो लोगों में ये है कि बहुत अधिक धन होने पर वे अधिक खुश होंगे जबकि ये सही नहीं है

बहुत बहुत धनाढ्य लोगों को आठ आठ आंसू रोता देखा गया है सबसे सच्ची बात है संतोषम परम सुखम ।धन परस्पर व्यवहार का साधन है खुशी की गारंटी नहीं सोने के विस्तर पर सोने वालों की आंख में नींद नहीं होती ।जैसे राजा मिडास को जब ये वरदान मिला था कि वो जिस वस्तु को छुएगा वो सोना बन जायेगा तो उसको अपना वरदान ही अभिशाप लगने लगा था क्योंकि उसका भोजन भी सोना बन जाता था ।

··················

टिप्पणियाँ

टिप्पणी करे