देवताओं ने पकडा बाजार
युग के अनुरूप बदल गये
देवालय मंदिर के संग संग
इन्टरनेट पर भी छा गये ।
भक्तों के अनुकूल सोचा
समय नहीं है उनके पास
क्यों नहीं घर घर चल कर
पूरा कर दूं उनकी आस।
शायद ये भी सोचा उन्होंने
भक्ति भक्तों की लाचारी है
भावी अमंगल के भय से
इसका सिलसिला जारी है।
अब ये भजन नहीं कर पाते
मशीनी भक्ति करते हैं
भजन के सारे रिकार्डस
एलेक्सा से ही सुनते हैं ।
लाखों करोडों का व्यापार
उनके नाम पर चलता है
अमीर गरीब परिवार
इनके बल पर पलता है।
श्री गणेश,मां लक्ष्मी ,मां दुर्गा
मां संतोषी ,खांटू श्याम
श्री राम ,श्री कृष्ण ,मां शारदा
अनेक रूप हैं अनेक नाम ।
सबके हैं वस्त्र आभूषण
अस्त्र शस्त्र और वाहन
विविध रंग ढंग लिये हैं
भक्तों में अति आकर्षण ।
ऐसा महंगा व्यापार चलता
चुनरी पटका लहंगा का
गोटा पट्टा ,धूप दीप ,अगरू
चंदन ,सिन्दूर,रोली का ।
फूल ,प्रसाद ,माला ,बेलपत्र
आक,धतूरा,गेंदा,बेला ,गुलाब
नित्य सजते देवों के सिर
बना जाते हैं दृश्य भव्य।
ऑफ लाइन और ऑन लाइन
हर जगह देव प्रेजेन्ट हैं
जैसी शक्ति वैसी पूजा
करने को लोग स्वतंत्र हैं ।
बाजार ने ऐसे लिया है
गिरफ्त में देवताओं को
कभी भी घाटा नहीं मिलता
किसी विक्रेता ,क्रेताओं को ।
विद्या
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