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Eternal Learner

“भावी मानव सभ्यता “

विवाह से होगी दूरी

लिविंग होगी मजबूरी

स्वतंत्र रहेंगे सारे लोग

स्वच्छन्द हो करेंगे भोग।।

बच्चे पैदा नहीं करेंगे

फैक्टरी में बनवायेंगे

गणेश सी अक्ल कृष्ण सी शक्ल

शक्ति में हनुमान बुद्धि प्रबल।

जैसा आर्डर करेंगे

वैसा बच्चा पायेंगे

बिना झंझट परिश्रम के

रेडीमेड ले आयेंगे।

जिनको जरूरत होगी

बेबी लेकर आयेंगे

गर्भ धारण का झंझट

वो झेल नहीं पायेंगे।

नव रस तहस नहस होंगे

न वात्सल्य न प्रेम राग

जड होगी मानव सभ्यता

विस्मृत होंगे सारे अनुराग।

मशीन बन जायेंगे हम

जीवन नीरस हो जायेगा

संस्कृति भूल जायेंगे

नूतन सभ्यता बनायेंगे।

विद्या

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टिप्पणियाँ

One response to ““भावी मानव सभ्यता “”

  1. famousflowerf835fde5e2 अवतार
    famousflowerf835fde5e2

    वर्तमान समय के लिए अत्यंत प्रासंगिक और विचारोत्तेजक रचना।

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