What’s a piece of media (book, movie, song) that changed how you see the world?
मिडिया के सारे रूप पुस्तक फिल्म गीत जो सोद्देश्य लिखे गये हैं वो कुछ न कुछ मात्रा में समाज पर असर डालते ही डालते हैं ।इसके लिये किसी एक को यश नहीं दिया जा सकता है ।हां जो मात्र मनोरंजन के लिये बने हैं उनकी बात अलग है।जैसेस्वतंत्रता संग्राम काल में वीरों का कैसा हो वसन्त ,बोल मेरे सेनापति मन की गुत्थी खोल,चाह नहीं मैं सुरबाला के गहनों में गूंथा जाऊं, हिमाद्री तुंग शुंग से प्रबुद्ध शुद्ध भारती ,वीर तुम बढे चलो ,मैं हूंएक सिपाही जैसी रचना जनता के रक्त में उबाल ला देती थी लोग जान न्योछावर करने को तैयार होजाते थे।मैं दुनिया को शैवाल से भरे तालाब की तरह देखती हूं जहां खडे होते हैं वहां का शैवाल हटाकर हम आगे वढ जाते हैं ।आदिम सभ्यता से आजतक इतनी बार दुनिया बदली है उसकी गणना नहीं है ।आज भी नित नूतन आविष्कारों के कारण परिवर्तन आ रहा है।
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