What’s something you used to believe as a kid that seems ridiculous now?
बचपन में मैं मातृविहीन हो गई थी ।करीब दस साल तक नानी के पास थी ।उनके घर के बडे आंगन में खटिया पर जब नानी के साथ सोती थी तब मां के बारे में बात करती थी।मुझे फुसलाने के लिये बताती थी कि तुम्हारी मां उन तारों में चली गई है देखो तुमको देख रही है ।कभी ध्रुव तारा के पास तो कभी सतभैया के पास कभी शुक्र ग्रह के पास यानी जगमगाते तारों भरे आकाश में कहीं भी मेरी मां को दिखाती थी और नुझे सचमुच लगता था कि तारों में जाकर मेरी मां भगवान बन गई है पर मुझे भूली नहीं है आज भी मुझे देखती है प्यार बरसाती है।इस कल्पना में मैं इतना डूब जाती थी कि जबतक जगी रहती थी तबतक उन्ही तारों में मां को ढूंढती रहती थी।आज सोच कर हंसी आती है कि नानी मेरे बालमन में इतनी सजीव
कल्पना जगा जाती थी कि उसी में बहल कर मैं सो जाती थी ।
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