What’s a time you followed your gut and it turned out to be exactly right?
जीवन में अनेकबार मुझे मेरी अंतर्दृष्टि का साथ मिला और मैने महसूस किया कि मेरा सब कॉन्सेन्स बहुत दूर की सोच सकता है ।जैसे बेटियों के बडे स्कूल में नामांकन के समय मुझे अंदर से डर लग रहा था कि पता नहीं टेस्ट में पास होगी कि नहीं अब नर्सरी क्लास में क्या टेस्ट पर इतना ध्यान नहीं था कि कितनी आयु में होना था ।बडी बेटी की आयु छे महीने कम थी फिर छोटी का सवाल ही नहीं था ।दूसरे साल गई तो भी किसी नकिसी बहाने उसका नामांकन नहीं ही हुआ ।मैने सोचा मैं पहले ही डर रही थी पता नहीं इतने बडे स्कूल में नामांकन होगा कि नहीं और नहीं ही हुआ फिर दूसरे स्कूल में मैने नामांकन करवाया ।
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