समय आया रोपनी का
लोग तैयार होने लगे
टैक्टर ,हल,बैल,नर,नारी
कुदाल ,फावडा जुटाने लगे।
बडी कृपा है भगवान की
रिमझिम रिमझिम वर्षा हुई
इस बार मेघ मनचाहा वर्षा
जल की कोई कमी न हुई।
समय पर डाले गये बिचडे
एक ओर लह लहा रहे
खेतों में अब लग जाना है
इसके लिये पुकार रहे।
प्रसाद ,अगरबत्ती ,फूल ,जल
लेकर मेडों की पूजा की
खेतों की अन्नपूर्णा की
पूजा कर रोपनी शुरू की ।
सारे कृषक पत्नी समेत
धोती साडी में आये
निश्चित दूरी पर क्रम से
बिचडा को रोपते आये।
उत्सव धर्मी देश के लोग
मौका आनंद का नहीं छोडते
रोपनी हो या कटनी हो
गाना गाना नहीं छोडते ।
बीस दिनों तक रोपनी होगी
जलखई की चिन्ता नहीं
ऊपर से जो पैसे मिलेंगे
दिन फिर कटेगा सही सही।
गमछी पर ही खेत के पानी से
सत्तु का साना जाना
गुल्ला बना प्याज संग निगल
पेट पूजा करते जाना।
हिलमिल कर काम कर
रोपनी को पूरा करना
नन्हें मुन्ने को मेड पर
गुदडी में सुलाकर रखना ।
काम पूरा होनेतक तो
मानों कोई त्योहार है
पति संगी के संग संग
खेतों में रहना व्यवहार है ।
विद्या
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