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Eternal Learner

“भरोसा”

भरोसा किसका करें प्रभु

कोई इसके लायक नहीं

कौन सा दौर है कलियुग का

कुछ भी पता चलता नहीं।

धोखा देने वालों की दुनिया

कपट,प्रपंच से भरा हुआ

ईर्ष्या ,लोभ ,लालच से भरा

सर्वत्र सब कुछ छला हुआ।

दुष्टता,चोरी,धोखाघडी

से भरोसा टूट जाता

प्रेम ,सदभाव,विश्वास से

ही है जुडा इसका नाता।

कूप में ज्यों भंग पडी हो

रीति ,नीति ,क्रिया,कलाप

सारे रिश्ते बिखर रहे हैं

कहां गये वो मेल मिलाप।

बाप ,बेटे ,माता, पिता

पत्नी ,प्रेमिका, मित्र ,वित्र

कोई भरोसे का न रहा

जिन्दगी हो गई विचित्र ।

पति पत्नी एवं पत्नी पति को

मारते देर नहीं लगती

धुंधले हुए सारे रिश्ते

विश्वास की जड न जमती।

अग मेरा है जग मेरा है

ये दुनिया है सिर्फ मेरी

लेकर ऊपर जाऊंगा

जो भी है धन दौलत मेरी।

देश चल रहा राम भरोसे

विश्व की कहीं नहीं कमान

सृष्टि पूरी नाच रही है

ता ता थैया दे दे तान ।

राम भरोसे दुनिया चलती

दीन ,ईमान,धर्म ,कल्याण

जो हो रहा है वो राम जी

जो नहीं होता वो भी श्री राम

विद्या

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