What’s the funniest misunderstanding you’ve ever been part of?
मेरे जीवन में सबसे हास्यास्पद स्थिति तब आई थी जब मैं पटना विश्वविद्यालय के कुलपति के आवास पर अपनी पीएच डी के किसी कार्य के सिल सिले में गई थी ।वहां राजेन्द्र नगर में उनके घर के बाहर वाले वरामदे पर आठ दस लोग बैठे थे।मैं भी वहीं पडी एक कुर्सी पर बैठ गई ।हमारे वी सी साहब वहीँ पर बैठे थे घर के लिबास में मैं पहचान नहीं पाई थी।सब लोग चकित थे कि ये आई तो विश भी नहीं की ।दस मिनट के बाद वीसी ने पूछा क्या काम है ।मैंने बताया तो वे अंदर से कलम लाने गये फिर मेरे पेपर पर कुछ नोट लिखने लगे जबतक नोट लिखते रहे तबतक मैं समझती रही कि कोई स्टाफ है नोट तैयार कर रहा है बाद में सर से साइन करवा लेगा।पर जब उन्होंने साइन भी कर दिया तो मैं हडबडा कर उठी और पूछ लिया कि आप वी सी हैं सर फिर बारम्बार प्रणाम करने लगी बाकी सारे सिनियर टीचर लोग थे मॉर्निंग वॉक के लिबास में सब को प्रणाम किया सब लोग खूब हंसने लगे थे मैं अपनी नासमझी पर लज्जित थी।
टिप्पणी करे