vidus

Eternal Learner

“विश्व बाजार बना”

बाजार व्यापक हुआ आज

सम्पूर्ण विश्व में फैल गया

बेचने खरीदने में लगे लोग

सब कुछ रेलम पेल हुआ।

ऑनलाइन औ ऑफ लाइन

सारे मार्ग हैं खुले हुए

घर बैठे ,बैठे पसन्द कर

जो मन हो मंगा लीजिये।

खाद्य सामग्री संग बिकते

ज्ञान ,विज्ञान औ चमत्कार

प्रसाधन सामग्री संग बिकते

घंटी ,माला,चंदन अपार।

शिक्षा बिकती ,दीक्षा बिकती

कथा ,प्रवचन ,चुटकुले अपार

बेचने में लगे हैं लोग

साथ ही खडे हैं खरीददार।

मंत्री,संत्री ,अफसर ,इंजिनियर

जज,कलक्टर ,क्लर्क ,रजिस्टार

सभी बिकने को खडे हैं

मूल्य चाहिये धन अपार।

लेन देन की ऐसी क्षिप्रता

कभी देखी न सुनी गई

घर बैठे दुनिया खरीद लो

प्रतियोगिता भी गजब हुई।

जितनी बार मंगाओ लौटाओ

कोई बंधन है ही नहीं

बाजार पहुंचा है घर घर

होडम होड की कमी नहीं ।

बाजार की सीमा अपरिमित

चांद की भूमि भी बिकने लगी

अंतरिक्ष की दसों दिशाएं

सेटलाइटस से सज गईं।

कुछ भी पढिये आप बनिये

डॉक्टर ,इंजिनियर ,ऑडीटर

व्यापार बुद्धि नहीं है तो

हो जायेंगे बिलकुल फेलियर।

कुछ भी बेच सकते आप

बेचने की बुद्धि लगाइये

मारकेटिंग सीखने में

सारा तिकडम भिडाइये।

विद्या

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