कुछ लेकर नहीं आये हैं
खाली हाथ जाना है
सीख ये गीता का
जीवन का फसाना है।
फिर भी लक्ष्य बडा हो
उसका,सुकर्म से सजा हो
सन्मार्ग पर चलते ,चलते
पावन लक्ष्य पाना हो।
ऊंचे लक्ष्य पाने हेतु
साहस ,लगन जरूरी है
ईमानदारी परिश्रम से
आगे बढना जरूरी है।
क्या बनना चाहते हैं
क्या बन पायेंगे अब
मौका समय पर निर्भर है
क्या कुछ कर पायेंगे सब।
लक्ष्य बडा हो हिमालय सा
ऊंचा,सुदृढ ,विस्तृत ,विशाल
दूर दृष्टि पक्का इरादा ले
पा सकते हम हर हाल।
ऊंची ऊंची आकांक्षाएं
पूरी होती जाती हैं
ऊंचा सोचने वालों को
मंजिल मिल ही जाती है।
लक्ष्य ही बडा न हो
तो कैसे आगे बढेंगे
जितनी दूर का सोचेंगे
उससे कम ही रह जायेंगे ॥
जीना मरना तो लगा है
पर उद्देश्य होना चाहिये बडा
समाज को कुछ देकर जाना है
इसी प्रण पर रहना है खडा ।
ऊंचे लक्ष्य वाले समाज में
अवनति कभी न आती है
बढती जाती ऊपर ऊपर
उन्नति शीर्षस्थ हो जाती है।
विद्या
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