आंख चुराने वालों से
चुप रहने वालों से
नाक रगडने वालों से
धोखा देने वालों से
डर लगता है।
झूठे समाचार से
ठंडे व्यवहार से
नकली प्यार से
प्यार में इंकार से
डर लगता है।
रोते रोते जीने से
प्रिय वस्तु छिन जाने से
अनजानों के आने से
रूठों को मनाने से
डर लगता है।
इन्टर नेट के जाने से
हेल्पर के न आने से
वेबात चापलूसी से
कुटिल भाव मुस्की से
डर लगता है।
भूमाफियों की करतूत से
कर्जों की सूद से
कचहरी के मसूद से
वकीलों के मूड से
डर लगता है
अनुशासन के रूल से
मन के प्रतिकूल से
टोटके किये फूल से
आंखों में पडी धूल से
डर लगता है।
नेताओं के अनशन से
प्रशासन के टेंशन से
युवाओं के श्लोगन से
विरोधियों के प्रलोभन से
डर लगता है ।
अनजाने फोन से
प्रेम के त्रिकोण से
आंधी वाले पौन से
कह कहे के मौन से
डर लगता है।
साइबर की ठगी से
बदले की अगलगी से
लडकी की गुमशुदगी से
स्लम की गन्दगी से
डर लगता है।
डॉक्टर की फीस से
अस्पताल की रसीद से
अटेन्डेन्ट की खीस से
दर्द की टीस से
डर लगता है।
शंकराचार्यों के रुख से
धर्मान्धों की भूख से
मठाधीशों के सुख से
आम जनता के दुख से
डर लगता है।
ए आई के ज्ञान से
आज के विज्ञान से
भविष्य के अनुमान से
लोगों के कच्चे कान से
डर लगता है।
विद्या
——////——////——////——////——////——////——
टिप्पणी करे