vidus

Eternal Learner

“आधुनिक संवाद”

कैसी हो?ठीक ही हूं

नया समाचार?

नहीं कुछ नहीं ।

फोन क्यों किया अभी ?

बात नहीं हो पाती कभी

मन नहीं लगता बैठे बैठे

ध्यान चला जाता है

सोचा याद दिला दूं तुमको

हमलोगों से भी नाता है।

क्या बकवास करने लगी हो

मजबूरी नहीं समझती हो

ये उलझन ,वो सुलझन

में फंसता रहता हूं

नहीं देखती हो?

देखती भी हूं समझती भी

डर से फोन भी नहीं करती

ज्यादा दिन होने के बाद

धीरज खो देती हूं ।

जीवन का दूसरा छोर है

ये सबसे बुरा दौर है

कितने लोग छूट रहे हैं

स्नेहिल भाव टूट रहे हैं।

क्षुब्ध करती ये अनुभूति

अन्तर्मन शीशे सा भंग है

जाने जीवन का कौन रंग है

नित नया दिन बदरंग है।

छोडो तुम अपना बतलाओ

समय नहीं तो बाद में बताओ

ईश्वर करे उलझन सुलझा लो

परिजन को टेंशन से बचा लो।

मैं तो यूं ही चिंतित होती

इसी में पूरा दिन खेती

कभी तुमको कभी उसको

बात कर परेशान करती।

समय मिलने पर बात करूंगा

शिकवे शिकायत दूर करूंगा

केवल अपना ध्यान रखना

मेरे आने के बाद ही मरना।

इत्ता सा स्नेह ही सुख दे देता

बेटा मरने की चिंता करता

विजी है कितनी बात करेगा?

काम पर भी न ध्यान धरेगा ?

हृदय आनंद से भर जाता

ढेरों आशीर्वाद निकलता

अनंत धन वैभव मिल जाये

असीम यश कीर्ति कमाये ।

विद्या

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