नाम भोला काम भोला
काम का अंजाम भोला
महादेव उदार हृदय से
प्रदान करते वर भोला।
भोले की कथा निराली
वही रक्ष भस्मासुर वाली
अमर बनने को तप किया
अनंत काल तक ध्यान किया।
बाबा की समाधि टूटी
दर्शन दे कहा वर मांगो
विनीत भाव से नमन कर
भस्मासुर ने ये वर मांगा।
मैं अजर अमर हो जाऊं
कभी नहीं मारा जाऊं
औ जिसके सर पर हाथ धरूं
उसको क्षण में भस्म कर दूं।
हैं औघड दानी भोले
बिना चिंतन एवमस्तु बोले
वर पा कर असुर मुस्काया
अभी इसकी जांच हो ले।
इसके लिये कहें जाऊं
आप पर ही आजमाऊं
रख कर हाथ आपके सर
अभी जांच करूंगा वर।
सुनकर बाबा चकराये
अपने वर से ही घबराये
लगे भागने उसके डर से
दुर्गम पहाड ,अगम मग से।
सच ही वरदान प्रभावी होता
देने वाले को भी खाता
मुख से निकला कोई वचन
फिर लौट कर नहीं आता।
करें तो क्या करेंगे बाबा
कैसे इससे बचेंगे बाबा
वो तो सरपट दौडे आगे
पीछे पीछे राक्षस भागे।
भक्तों के महादानी बाबा
उसी के डर से भाग रहे
इस दृश्य को अंतरिक्ष से
सारे देवगण देख रहे।
देखा जब विष्णु ने इसको
समझ गये वो असुर की मंसा
इस उदार नीति के कारण
दिया है महादेव को फंसा।
कुछ न कुछ तो करना होगा
वर के प्रभाव को हरना होगा
नहीं तो अनर्थ हो जायेगा
ये कुछ भी कर जायेगा।
सोच कर अपने मन में
प्रभु ने कुछ ठान लिया
बन कर नर्तकी वहां पहुंचे
राक्षस का हाथ थाम लिया।
सुन्दरी का स्पर्श पाकर
गुद गुदी हुई उसके मन में
सोचा देखूंगा बाद में
अभी तो डूब लूं आनंद में।
प्रभु ने नृत्य प्रारंभ किया
संग संग उसको करने कहा
धुन में वो भी नाचने लगा
उनके ताल के संग वहां।
दर्शक गण गगन से देखें
पालन कर्ता प्रभु की कला
ताल ,लय ,भंगिमा अनोखी
सुन्दर दृश्य निर्मित हो चला ।
भोले तो जड से खडे थे
विष्णु की मति जान रहे थे
कैसे संकट दूर करेंगे
इसको वो पहचान रहे थे।
नृत्य के क्रम में गोविन्द ने
सर पर अपना हाथ रखा
भाव विभोर भूले असुर ने
वैसा ही करना शुरू किया।
फिर क्या क्षण भर में ही
भस्म हुआ भस्मासुर वहां
हर्ष ध्वनि गूंजने लगी
खुश हो गया सारा जहां।
सरल हृदय मतवाले शंभु
सबको सबकुछ देते हैं
भाल का कलंक मेटते
मालामाल कर देते हैं।
विद्या
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