How did you meet your significant other?
मैं अपने महत्व की परवाह नहीं करती मैं थोडा अंतर्मुखी व्यक्तित्व की हूं जब कोई बात करता है तभी करती हूं अन्यथा
चुप रहने में ही भलाई समझती हूं ।मैं चाहती हूं कि मेरे बोलने से ज्यादा मेरे काम से लोग पहचाने नहीं तो कोई बात नहीं।बडे बडे विद्वानों की बात हम लोग भूलते जा रहे हैं फिर मैं किस खेत की मुली हूं ।जबतक हूं कुछ कुछ करती रहूं भगवान चलते फिरते ले जायें यही कामना है।
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