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Eternal Learner

“राखी का त्यौहार “

रंग बिरंगी राखियां सारी

दूकानों में सज गई थीं

आने वाला है त्यौहार

चमक चमक कर बता रही थी।

सखियां पर्व की खुशी में

महीना भर से इंतजार में थीं

इस बार ये लूंगीं मैं मां

राखी में कह रही थी।

बिना भाई वाली बहना

मनाती कोई कजन आ जाये

हम भी उसी को बांध कर

ये शुभ त्यौहार मनायें।

जबतक भाई नहीं आया था

राखी का दिन दुखी करता

पांचों बहनों का मुंह बना कर

पूरा का पूरा दिन कटता।

भाई जरूरी है जीवन में

ये बात तडपाती थी

काश एक भाई हो जाता

आपस में समझाती थी।

दूसरी बहनों को खुश देख

सिहाती थी अपने मन में

कितनी लकी है ये लडकी

दो दो भाई हैं घर में ।

कट गये दुख भरे वो दिन

प्यारा सा भाई आया

उल्लास भर गया मन में

सबका मन हरषाया।

अब लगा अपार धन मिला

प्रसन्नता की सीमा नहीं

नन्हें के छोटे हाथों में

पांच पांच राखियां सजीं।

कुछ खिला नहीं सकते थे

अभी बहुत छोटा था

पर मिठाई पकवान तो

घर में भर ही गया था।

मेरे घर भी मनी है राखी

इस बार धूम धाम से

साफ सफाई सजावट में

फुरसत न मिली काम से।

स्नेह बंधन भाई बहन का

प्यार भरा होता है

कितना छोटा हो भाई

आशा पूरी करता है।

विद्या

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