अम्बिया के छोटे टुकडों में
डालकर नमक मिर्च थोडा
बांध कर कपडे में उसको
घुमा घुमा कर यूं मोडा।
बन गया चटपटा स्वाद
लेकर चले अमराई में
गर्मियों के दिन कटते
नानी जी के घर मस्ती में ।
छिप कर भागते थे घर से
लू की हिदायतों के बाद
बडे लोग सोते दुपहरी में
फिर कौन मानता है बात ।
पेड पर चढना उतरना
सब खेल खेलते रहना
वो चटपटा आम खा कर
नदी से पानी पी लेना ।
नहाते थे नदी में कभी
घंटों तैरते रहते थे
लाल हो जाती थी आंखें
कपडे शरीर में सूखते थे।
लाल आंख से पकड लेती
मां घर पर आने के बाद
कभी नहीं लाऊंगी यहां
इस बार लौटने के बाद।
मानते नहीं बात तुम सब
चोरी से भाग जाते हो
उल्टा सुल्टा खेल खेल कर
तबियत खराब करते हो।
मुंह सुटका कपडे पहन
अब नहीं जाऊंगा फिर से
वादा करके बैठ जाता
नाना जी के घर डर से।
दूसरे दिन याद कहां वो
कल के वायदे की बात
बडी मस्ती करते थे हम
अभी भी आती है याद ।
विद्या
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