समय बीतता हमारा आज
मोबाइल के स्क्रीन पर
दौडती रहती हैं नजरें
एक से इक्कीस सीन पर।
इन्टरनेट पर टहलते हुए
विश्व भ्रमण हम करते हैं
बैठे बैठे घर में ही
पूरा मनोरंजन करते हैं।
क्षण में सुनते प्रवचन हम
क्षण में चुटकुले सुनते
ज्ञान भरी बातें सुनकर
मन ही मन में हैं गुनते ।
नेशनल कन्टीनेन्टल डिश
बनाना तो रोज सीखते
कभी कभी इच्छानुसार
बनवा कर खा भी लेते।
भानुमती का पिटारा कहें 
या कहें ज्ञान का भांडार
लाभ उठाते रहते हैं हम
इस इंटरनेट पर अपार।
सृष्टि के सारे जीवों की
गतिविधियां देख पाते हैं
क्षेत्र ज्ञान का खुल जाता
अपना अज्ञान दूर करते हैं।
अनंत क्षेत्र ज्ञान का खुलता
आकाश से पाताल तक
साईंस ,आर्टस ,कामर्स से
इतिहास,भूगोल ,अर्थ शास्त्र तक।
पक्षी कैसे घोंसला बनाते
मकडी बुनती है जाला
कैसे कौवा चोरी से करता
अपने अंडों का घोटाला।
छोटी चिडिया कैसे करती
बच्चों की रखवाली
बंदर के बच्चे कैसे कूदते
फांदते हैं डाली डाली ।
शेर का शिकार करना
हिरण का सरपट भागना
हाथी का उठा उठा कर
सिंह ,बाघों को पटकना।
जैसी रूचि वैसा रील मिलता
फेश बुक ,इंस्ट्रा ,यू ट्यूब पर
हमारा मन जिसे देखें दिखायें
मोबाइल के इंटर नेट पर ।
समाज रील बनाने में लगा
जैसा जो कुछ कर सकते
विचित्रता प्राथमिकता बनी
चलनी में पानी भर सकते।
विद्या
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