How does your mindset affect your financial success?
पैसों को लेकर मेरी दृष्टि अलग है।बचपन में भी जब किसी त्योहार में परवी के पैसे मिलते थे तो सबसे पहले उसको खर्च करने पर मेरा दिमाग जाता था।संयोग से छे भाई बहनों में सबसे बडी थी तो सबसे पूछ कर कि क्या करना चाहिये कभी चाट कभी आईसक्रीम कभी मूंगफली की पार्टी करती थी और पूरा मनोरंजन होता था।मेरे पापा मेरा तरीका देख कर कहते थे कि मेरी बेटी तो बादशाह है।वही बादशाह वाली प्रवृति आज तक बनी हुई है संग्रह मुझसे नहीं हो पाता है इसीलिये दोनों पति पत्नी की क्लास वन कैटेगरी की नौकरी होने के बाद भी जितना संग्रह होना चाहिये वो नहीं हुआ है।अब तो और लगता है कि खा पी कर मरने लायक धन तो है ही वचत करके क्या करना है ।संयोग से बच्चे सब भी ठीक ठाक हैं किसी को मेरे पैसे की जरूरत नहीं है इसीलिये हमदोनों अपने अपने पेंशन के पैसे को आराम से खर्च करते हैं थोडा बहुत जो फिक्स कर रखा है वही बच्चों को मिलेंगे ।कहा भी जाता है कि धन की तीन गति होती है दान ,भोग,नाश इसीलिये मैं अपनी सम्पति को नाश से बचाने केलिये थोडा बहुत दान करती हूं पर भोग में ज्यादा खर्च करती हूं जिससे लोगों को लगता है कि बहुत पैसा है इनके पास पर ऐसा कुछ नहीं है ।
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