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Eternal Learner

“उम्मीद किससे करें”

हर तरफ हार है

आशा वेजार है

दुख का अंबार है

अडचन अपार है

उम्मीद किससे करें।

लुटता भूखंड है

अरमान खंड है

बढता घमंड है

क्रोध प्रचंड है

उम्मीद किससे करें।

सच्चाई कांपती है

झूठी बातें चांपती है

नारी सब भांपती है

दुष्टों को नापती है

उम्मीद किससे करें।

संगठन का सिस्टम है

परसेन्टेज कस्टम है

बेईमानी मस्टम है

जनता पस्तम है

उम्मीद किससे करें।

मेहनत बेकार है

अज्ञान का प्रसार है

चहुंदिश अंधकार है

दीपक लाचार है

उम्मीद किससे करें।

सफलता जरूरी है

परिश्रम मजबूरी है

करना जी हजूरी है

मालिक की मंजूरी है

उम्मीद किससे करें।

गिडगिडाते रहते हैं

डर डर कर कहते हैं

मक्खन सर्वत्र लगाते हैं

अपना काम बनाते हैं

उम्मीद किससे करें।

आशा अपार है

भ्रम भरा संसार है

करना आर पार है

स्वार्थ की मार है

उम्मीद किससे करें।

छिडी हुई जंग है

हाथ सबके तंग है

प्रशासन मतंग है

जनता मलंग है

उम्मीद किससे करें।

पर्यावरण नष्ट है

जीने में कष्ट है

अधिकारी भ्रष्ट है

अंधों की गश्त है

उम्मीद किससे करें।

विद्या

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