vidus

Eternal Learner

“आलस्य”

आलस्य योग की साधना

में ही उनका दिन कटता

पर ज्ञान देने में वो तो

सबसे आगे ही रहता।

आलसी के तीन काम

खाना पीना औ आराम

कभीहिलना डुलना नहीं

काम कुछ करना है नहीं।

गिरे अगर सूखे कुएं में

सोचते यहीं पर सो लूं

होगी सुबह फिर देखूंगा

यहीं रहूं,बाहर निकलूं ।

दूसरे को बढते देख

बैठ कर सिहाते रहते

चलें दूसरे,पहुंचे हम

ऐसी ही भावना रखते।

कोई काम नहीं करने

के कितने बहाने होते

बिना मेहनत सब पाने

के लिये लालायित रहते।

पढूंगा कैसे यहां मैं

खाना टाइम पर नहीं

जगता हूं इतनी जल्दी

मिलता कोई फल नहीं।

घास छीलने जायेंगे तो

खुरपी टूट ही जाता है

कपडा सिलने जायेंगे तो

कपडा ही कट जाता है।

कहीं भी करें काम उनको

कुछ न कुछ शिकायत रहती

नहीं करने की बली इच्छा

उनके मन में सदा रहती।

कामचोरों की भरमार

समाज में हो गई है

बिना परिश्रम सब पाने की

व्याकुल इच्छा हो गई है।

विद्या

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