अम्बिका रूप में महालक्ष्मी
करूणामयी,तेजस्वी रूप
अत्यंत सुन्दर ,मुख मंडल शांत
दीप्तिमान मंद मुस्कान युक्त।
महिषासुर से परास्त देवगण
नाश का मार्ग खोजने लगे
अपने -अपने अस्त्र प्रदान कर
महालक्ष्मी दुर्गा प्रकट किये।
अट्ठारह भुजाओं वाली दुर्गा
शस्त्रों के संग प्रगट हुईं
अंतरिक्ष के विशाल फलक पर
दिव्य ज्योति सी चमकने लगीं।
लाल रेशमी परिधान संग
स्वर्ण आभूषणों से सज्जित
मध्यम देहयष्टि उनकी
आध्यात्मिक उन्नयन को प्रस्तुत।
सिर से लेकर पांव तक उनके
मुकुट,टीका,नथ,झुमके
,मणी माला, करधनी ,पायल
से सजे हुए हैं अंग उनके।
तीनों लोकों में राज था दैत्य का
धरती ,आकाश ,सर्वत्र राज
एक सुन्दर पहाड़ी पर महा लक्ष्मी
लगी करने देवों के काज।
दिव्य कन्या देख अकेली
दैत्यों के गण आकर्षित हुए
इस बात की शुभ सूचना
महाराजा को पहुँचा आये।
त्रिलोक का बना था स्वामी
अहंकार से परिपूर्ण बैठा था
महा सुन्दरी कन्या की बात सुन
अत्यंत उत्कंठित हो उठा था।
महिषासुर फूले न समाया
अविलम्ब लाने को सैन्य पठाया
चामर,चिक्षुर सेनापति संग
राक्षस समूह को भिजवाया।
विशाल सेना को आते देख
देवी तनिक न विचलित हुईं
सुन कर विवाह का प्रस्ताव
हंसती हुई इस तरह बोलीं।
प्रस्ताव उचित है तुम्हारा
करो पराजित युद्ध में मुझे
कर लूँगी मैं विवाह महाराज से
निराश नहीं करूँगी तुझे।
युद्ध प्रारंभ हुआ सेना से
घनघोर ध्वनियाँ गूंजने लगीं
महिषासुर की सेना के साथ
महालक्ष्मी दुर्गा अकेली लड़ीं।
त्रिशूल,तलवार,चक्र,शंख,गदा
आदि अट्ठारहों शस्र लेकर
टूट पड़ीं महारानी दुर्गा वहाँ
विशाल सेना पर पिलकर ।
पूरी शक्ति से लड़े दैत्यगण
महालक्ष्मी का पार न पा सके
मुँह की खाकर युद्धभूमि में
पीठ दिखा कर दौड़े भागे।
फिर आया महिषासुर अपने
बहुत बड़ी सेना के साथ
क्रोधित हो माया दिखा दिखा
लगा युद्ध करने हाथों हाथ।
कभी हाथी ,कभी सिंह ,भैंसा
कभी मानव का रूप लिया
कभी दैत्य बन कर अनेक
आकाश मार्ग में विचरने लगा।
देवी ने भी पूरे कौशल से
चिग्घाडते हुए ,उछलते हुए
किया भयंकर युद्ध दैत्य से
माया का जबाब माया से दिये।
बहुत काल तक युद्ध करते करते
महा दैत्य को परास्त किया
भैंसा रूप में महिषासुर का
आख़िर देवी ने संहार किया।
महिषासुर मर्दिनी बनी देवी
महालक्ष्मी महा शक्ति वाली
देवताओं ने हर्षित ध्वनि कर
पुष्पों की वर्षा कर डाली।
राजस गुण से युक्त हैं माता
पालन,ऐश्वर्य शक्ति से संपन्न
अर्थ ,धर्म,काम,मोक्ष देतीं
रहने नहीं देतीं किसी को विपन्न।
विद्या
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