Eternal Learner

“नरक चतुर्दशी “

↳

नरकासुर के बध का दिन

नरक चतुर्दशी है आज

अत्याचार से मुक्ति मिली थी

हुआ था पूर्ण देवों का काज।

शक्ति और अहंकार के मद में

दानव ने सबको सताया था

कितनी ही कन्याओं को

उसने वंदी बनाया था ।

हर बाहर की तरह सुर गण

पालन हार भगवान को पुकारे

इस अन्याय से रक्षा कर दो

परम पिता परमेश्वर हमारे।

भूदेवी का पुत्र नरकासुर

प्राग्ज्योतिषपुर का राजा था

वरदान था उसको कि वो

सिर्फ माँ से ही मर सकता था।

तीनों लोक का दुख हरने

परम पिता जगदीश्वर आये

सत्यभामा संग गरूड़ पर बैठ

नरकासुर संग युद्ध किये।

भूदेवी का अंश थी सत्यभामा

आना उसका बहुत ज़रूरी था

माँ वाले वरदान को केवल

वही पूरा कर सकती थी।

चलते युद्ध में मौक़ा देख

सत्यभामा ने चलाया हाथ

उतार दिया था दानव को

क्षिप्रता से मौत के घाट।

फिर सोलह हज़ार कन्याओं

को मुक्त करवाया भगवन में

मान सम्मान आदर देने

सबसे विवाह किया उन्होंने।

अत्याचार के अंत की याद में

रूप चतुर्दशी मनाया जाता

एक दीपक यम के नाम का

घर से बाहर जलाया जाता।

लोभ ,क्रूरता ,अन्याय के प्रतीक

दानव को मार कर किया कर्म

अहंकार को दूर करके

बतलाया मानवता का धर्म ।

विद्या

॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰

··················

टिप्पणियाँ

एक उत्तर दें